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भक्तियोग

भक्तियोग

भक्तियोग

यह योगभाव प्रधान हृदय प्रधान योग है। इसके अतंर्गत जीव को गोविंद जी की भक्ति की तरफ अग्रसर किया जाता है। भक्तियोग परा-पे्रम का मार्ग है। जिस पर चलकर जीव अपने ईष्ट पर पूर्ण समर्पित हो जाता है और अंततः एकीकार हो जाता है। भक्तियोग में जीव को निष्काम प्रेम तथा समर्पण सिखाया जाता है। इसकी शुरूआत जीव को रूप के ध्यान से करवाई जाती है तथा भाव समाधि तक ले जाया जाता है। भक्तियोग के द्वारा जीव को ‘‘साकार सिद्धि’’ तक ले जाया जाता है। फिर निराकार सिद्धि और अंततः आत्मसिद्धि पर पहुंचाया जाता है।

कार्यक्रम

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